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पटना में हुए पीएम नरेंद्र मोदी के प्रोग्राम में भी गड़बड़ी फैलाने की थी साजिश

प्रकाशित: Jul 14, 2022 18:02रिपोर्ट: Navtej TV

बिहार के पटना से पुलिस ने आतंकवादी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, इनके निशाने पर प्रधानमंत्री मोदी का 12 जुलाई का बिहार दौरा था, पीएम के दौरे से 15 दिन पहले ही आतंकियों की ट्रेनिंग शुरू हो गई, यहां पीएफआई और एसडीपीआई की आड़ में आतंक की फैक्ट्री चल रही थी, यही नहीं यहां मिले संदिग्ध दस्तावेज में भारत को 2047 तक इस्लामिक मुल्क बनाने का जिक्र किया गया है।

बिहार की राजधानी पटना में पुलिस ने देश विरोधी गतिविधियों का खुलासा किया है। फुलवारीशरीफ में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) की आड़ में आतंक की फैक्ट्री चल रही थी। यहां लोगों को हथियार चलाने और धार्मिक उन्माद फैलाने की ट्रेनिंग दी जा रही था। खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर पटना पुलिस ने फुलवारीशरीफ स्थित नया टोला में पीएफआई के कार्यालय में छापेमारी की। मौके से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार संदिग्ध मो. जलालुद्दीन झारखंड पुलिस का सेवानिवृत्त दारोगा है। उसके साथ अतहर परवेज नाम के शख्स की भी गिरफ्तारी हुई है। कार्यालय की तलाशी में बड़े पैमाने पर आपत्तिजनक सामान बरामद हुए हैं। इसमें पीएफआई के मिशन-2047 से जुड़े गोपनीय दस्तावेज भी हैं। पीएफआई के मिशन-2047 के गोपनीय दस्तावेज के साथ झंडा, पंफलेट, बुकलेट और अन्य सामान बरामद हुए हैं। मिशन-2047 को भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए मुहिम चलाने से संबंधित दस्तावेज बताया गया है। इसके तहत दो समुदायों के बीच विद्वेष फैलाने और राष्ट्र के विरुद्ध दूसरे देशों से मदद का आह्वान किया जाना था।

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अतहर परवेज और मोहम्मद जलालुद्दीन दोनों एनजीओ के नाम पर आतंक की फैक्ट्री चला रहे थे और उनका मुख्य उद्देश्य हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काना था. मुस्लिम नौजवानों को यह दोनों अस्त्र-शास्त्र की ट्रेनिंग दिया करते थे और फिर राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर, जिला स्तर पर पीएफआई और एसडीपीआई के सक्रिय सदस्यों के साथ बैठक में किया करता था.दोनों संदिग्ध आतंकी सिमी के पुराने सदस्य जो जेल में बंद है उनकी जमानत करवाता था और उन्हें आतंकी ट्रेनिंग भी देते थे. पुलिस ने बताया कि 6 और 7 जुलाई को अतहर परवेज ने किराए पर लिए गए ऑफिस में कई युवाओं को मार्शल आर्ट और शारीरिक शिक्षा देने के नाम पर बुलाया और फिर उन्हें अस्त्र-शस्त्र की ट्रेनिंग तथा धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए भड़काया।

यहीं नहीं केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और अन्य कई राज्यों से युवा आतंक की ट्रेनिंग लेने के लिए यहां आते थे, पुलिस ने खुलासा किया है कि इन दोनों संदिग्ध आतंकवादियों को पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की समेत कई इस्लामिक देशों से पैसे की फंडिंग हुआ करती थी ताकि यह देश में रहकर देश विरोधी मुहिम चला सके