हिंदू धर्म में पितृपक्ष को लेकर कई प्रकार की मान्यताए है और इसी वजह से पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनकी पूजा की जाती है। कई लोग इस दिन खाना भी खिलाते है तो कोई दान करता है ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
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हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन अमावस्या तक पूरे सोलह दिन का समय पितृपक्ष के रूप में मनाया जाता है। तिथियों के अनुसार मृत पूर्वजों का श्राद्धकर्म किया जाता है। नवमी के दिन महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है।
अश्विन मास नवमी तिथि, रविवार 18 सितंबर 2022
अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी कहा जाता है और इस दिन महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है। इस दिन जल्दी स्नान करें और सफेद रंग के कपड़े पहनकर अपने मृत परिजन की तस्वीर रखें और माला चढ़ाएं। इस दिन गरुड़ पुराण का पाठ जरूर करें और भोजन करने से पहले पितरों का श्राद्ध निकाले। इसके बाद गाय, कौवा और ब्राह्मण आदि के लिए भी भोजन निकाले और दान करना नहीं भुले।
